Bandhan bank-बंधन बैंक

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Bandhan bank-बंधन बैंक

  • Bandhan bank-बंधन बैंक पहले एक माइक्रोफाइनांस कंपनी थी जो बंधन माइक्रो फाइनेंस के नाम से चलती थी।
  • बंधन बैंक  लघु उद्योग के लिए छोटे छोटे लोन मुहैया कराता थी।
  • Bandha bank apne क्रमचारियो के बदौलत बन्धन को 23अगस्त 2015 को बैंक का लाइसेंस मिला।
  • Bandhan bank अपने क्रमचरियो के कैरियर का कोई वैल्यू नहीं करता है।

Bandhan bank-बंधन बैंक में मेरी नौकरी

बात उन दिनों  की है जब मै  05/02/2010 को bandhan bank बंधन बैंक ( फाइनेंस) में c o पद पर नौकरी ज्वाइन कि तो  मेरा पहला ब्रांच बिल्कुल नया मिला था उसे हमी लोगो को ओपन करना था ।

 

Bandhan bank के ऑफिस को DSC के नाम से जाना जाता है हमारे मैनेजर   शंभू नाथ गोराई थे हमलोग पूरे दिन पैदल चलकर बंधन के बारे में पब्लिक को बताते थे तथा ग्रुप उठाने की कोशिश करते परन्तु लोग froud कह कर मना कर देते थे ।

 

हमारे बीएम सर बंगोली थे इसलिए उन्हें हिंदी बोलने मै दिक्कत होती थी इसलिए वो भोजपुरी बोलने में बिल्कुल असमर्थ हो जाते ,क्यों की मै बलिया उत्तरप्रदेश का रहने वाला था।

 

इसलिए मै हिंदी भोजपुरी की अच्छी तरह जानता था इसलिए बीएम सर मुझे पूरे रास्ते सिखाते थे कि लोगो के साथ कैसे बात करना है।

 

बीएम सर के सिखाए अनुसार। ही मै लोगो के बीच बात करता और धीरे धीरे जमलोगो की मेहनत रंग लाई हमलोग पहला दस कैस्टोमार का ग्रुप क्रिएट कर लिए जिसका नाम “गंगा” ग्रुप रखा गया परन्तु दो चार दिनों बाद ही हमलॉगो को मालूम हुआ कि वहां के लोग डिफाल्टर है इसलिए हम लोग उस ग्रुप में लोन वितरण नहीं किए।

 

फिर हमलोग दूसरा ग्रुप उठाकर लोन  बटना सुरु किए , 25 दिन बाद हमलोग के अफीस का उदघाटन हुआ उस समय हमारे डिविजनल मैनेजर देवाशीष सर एवम् आरएम अनुपम चक्रवर्ती थे।

 

हमरा आफिस नया होने के कारण उसमें कुछ भी वेवस्था नहीं था हम लोग जमीन पर चटाई बिछा कर सोते थे आफिस एक झाड़ नुमा गढ़े के ऊपर स्थित था इसलिए रात में बहुत डर भी लगता था वहा के लोगो के अनुसार वो मकान एक भूतिया मकान थी।

 

हमलोग उस मकान में आफिस खोले है यह सुनकर लोग अचंभित हो जाते थे परन्तु इसमें हम लोग कुछ नहीं कर सकते थे क्यों की ये निर्णय डिवीजन आफिस का था ।

 

धीरे धीरे आफिस ग्रो करने लगा और ग्रुप खुलता चला गया मै उस अफिक पर 26ग्रुप उठाया जिसमे समय लगा 6 महीना ,तब तक वहा पर एक दो और स्टाफ आ गए थे उस वक़्त हमारे पास आफिस द्वारा साईकिल लोन किया गया था जिसका किस्त मेरे सैलरी से कटता था ।

 

बिहार में हमारा पहला ट्रांसफर Bandhan bank-बंधन बैंक

 

जो स्टाफ आए थे उसमे एक सतेंद्र यादव थे जिनसे हमारी काफी बनती थी फिर कुछ महीनों बाद हमारा ट्रांसफर दूसरे डीएससी में हो गया ट्रांसफर के वक़्त मुझे काफी दुख हुआ था क्यो की ट्रांसफर का यह अनुभव मेरी लाइफ का पहला अनुभव था।

 

फिर मै गाजीपुर डीएससी में चला गया वहां पर मै लग भग एक साल ड्यूटी किया ,फिर मेरा ट्रांसफर एमटी विजय सर के द्वारा बलिया जिला के नगरा डीएससी में हुआ नगरा डीएससी में मै आठ माह काम करने के बाद मुझे बिहार के छपरा में ट्रांसफर हो गया।

 

इसलिए कि वाहा पर पहले से कर्मचारियों ने सीनियर के साथ बवाल करके काम करने से मना कर दिए थे ऐसी स्थिति में हमको सीनियर c o बनाकर बलिया से हमको लेकर लगभग 10 स्टाफ को छपरा सिफ्ट किया गया कलेक्शन करने के लिए ।

 

वाहा पर हमलोगो को वहा के कर्मचारियों के द्वारा काफी धमकाया गया परन्तु हम लोग डटे रहे क्यों की बंधन को हमलोग बहुत प्यार करते थे जो बंधन ने हमलोगो को रोजी रोटी का जरिया दिया था।

 

हम लोग बंधन से दगा बाजी नहीं कर सकते थे फिर धीरे धीरे माहौल शांत हुआ और छपरा में दो डीएससी आफिस था ,डीएससी1 में मै जुबैद हुसैन सर के साथ एक शाल रहा फिर डीएससी 2 में कृष्णकांत मंडल सर के साथ एक साल रहा ।

 

बंधन बैंक को माइक्रो फाइनेंस से बंधन बैंक का लाइसेंस 23 अगस्त 2015

छपरा आने के दो  शाल बाद हमे दूसरा प्रमोशन मिला डीएससी हेड का तब तक बंधन को आरबीआई द्वारा 2015 में बैंक का लाइसेंस भी मिल गया था।

 

मै bandhan bank में DSC haid बनकर छपरा के गड़खा डीएससी ज्वाइन किया वाहा पर मै एक शाल 2 महीना काम किया इन दिनो में मै काफी मेहनत और लगन से काम करके गड़खा डीएससी को एक नई मुकाम तक ले गया ।

Bandhan bank-बंधन बैंक में मेरा तीसरा प्रमोशनBandhan bank में 02 जून 2016 को मुझे तीसरा प्रमोशन मिला और मै एरिया मैनेजर के पोस्ट पर बनियापुर डीएससी ज्वाइन किया उस वक़्त मेरे अंडर में छ: डीएससी मिला जिसमें 1 बनियापुर 2भगवानपुर हाट 3 जनता बाजार 4 महराज गंज 5 पाच रूखी 6 जलालपुर

 

बनियापुर रिजन के अंदर पचरुखी डीएससी का डीएससी हेड किसी सीनियर का बात नहीं सुनता था बाकी सभी डीएसी हेड अपना काम ठीक ढंग करते थे परन्तु पचरुखी का डीएससी हेड अपना काम अपने। स्टाफ से करवाता था।

 

सभी डीएससी पर 3 हजार 32 सौ के आसपास कस्टमर्स थे ऐसे में सभी कस्टमर का ATM card और पिन कोड एक साथ एक ही लिफाफा में भर कर हेड आफिस से आया जो आरबीआई गाइड लाइन के खिलाफ था।

 

सभी dsc haid अपने अपने ऑफिस का एटम पिन लगभग सभी कस्टमर को बाट चुके थे तभी हेड आफिस से यह निर्देश मिला की बचा हुआ एटम सभी डीएससी हेड डिवीजन आफिस में लाकर जमा कर दे।

 

मै हेड आफिस के निर्देश के अनुसार सभी आफिस का एटम डिवीजन आफिस में जमा करवा दिया परन्तु  जब मै पचरुखी डीएससी हेड से पूछा तो बोला “हा सर मै सारा एटम जमा कर दिया हू”

 

तभी बनिया पुर में आरएम मीटिंग हुआ सभी डीएससी हेड आए थे पचरुखी का डीएससी हेड भी आया था और सभी डीएसी हेड से बंधन के ऊपर निगेटिव टिपणी कर रहा था जब मै रोका तो मेरे साथ भी तू तू मै मै करने लगा मै इस बात की जानकारी अपने सीनियर सपन सर को दी ।

 

उसी बीच हमारे डीएसी में सुबोध नंदी सर का भिजिट हुआ सुबोध सर हमे डीएससी भीजिट के दौरान क्या क्या चेक करना चाहिए इसके बारे में भी सर्कुलर से हट कर बताए थे।

 

तो मै वैसे ही सभी डीएसी को फॉलो करने लगा जब मै मॉनिटरिंग के दौरान पचरुखी पहुंचा तो डीएससी हेड एवम् सभी स्टाफ का लाकर चेक करने लगा तो 132 ईटीएम अभी भी आफिस पर मौजूद था इस बात की सूचना मै तुरंत अपने सीनियर सपन सर को दिया ।

 

दूसरे दिन ही क्लस्टर मीटिंग भी था इसलिए डीएससी हेड को निर्देश दिया गया कि सभी एटम मीटिंग में लेकर आना होगा, दूसरे दिन मीटिंग में जब सब लोग पहुंचे तो मै पचरुखी डीएससी हेड हरेश राय से पूछा।

 

” एटम लेकर आए हो “तो डीएम सर के सामने ही बोला मै भूल गया हूं वाहा पर देवाशीष सर भी थे जो उस समय सर्किल इंचार्ज थे फिर हमे निर्देश दिया गया कि डीएससी हेड को लेकर जाओ और सारा एटम अभी लाकर जमा कर दो।

 

मै डीएससी से सारा एटम लाकर उसी दिन जमा कराया और मै अपने डीएम सर से आग्रह किया कि “सर इस डीएससी हेड का बर्ताव अच्छा नहीं है इसका ट्रांसफर  कर दिजिए।

 

सर ने हमसे डीएससी हेड के ऊपर 10 फाइंडिंग्स निकाल कर एप्लिकेशन देने के लिए बोले मैंने वो भी लिख कर  दिया ये समय था अक्टूबर 2016 का तब भी उसका ट्रांसफर नहीं किया गया ।

 

एक सप्ताह बाद पचरुखी से एक स्टाफ राजनाथ को ट्रांसफर किया गया, जब मै डीएससी हेड को राजनाथ को भेजने के लिए बोला तो उसका जवाब आया आप आकर भेज दीजिए।

 

ये बात भी मै डीएम सर को बताया,दूसरे दिन डीएम सर जनताबाजार डीएससी में आने वाले थे इसलिए मै भगवानपुर से जनतबाजार चला गया वहां पर डीएम सर के साथ एमटी संजय सर भी आए थे।

 

डीएम सर बोले कि हरेश को फोन कीजिए मै बात करूंगा तो मै फोन लगा कर डीएम सर को दिया फोन पर डीएम सर एमटी सर को भी उल्टा सीधा बोला उसके बाद डीएम सर फिर हमसे बोले तुम फिर से उसके ऊपर 10 फाइंडिंग्स लिख कर कल सीवान लाओ।

 

इस बार मै उसका डिमोशन करा दूंगा,मै मॉनिटरिंग में निकला पूरा फाइंडिंग्स का कच्चा चिट्ठा लिख कर ले गया फिर भी उसके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं हुई ।

 

मेरी गलती यही हुई की मै सिकायात का रुख हेड ऑफिस के तरफ निही किया और 12 दिसंबर 2016 को मेरा आखिरी मॉनिटरिंग पचरुखी में हुआ।

 

उसके बाद पचरुखी डीएससी महराजगंज रीजन में चला गया और वाहा पर नया आरएम सनातन राय आ गए और मै दोबारा पचरुखी नहीं जा सका मेरे अंडर में पचरुखी डीएससी 6 मह 10 दिन रहा ।

 

इस दौरान  दो बार छिनतई हुआ co विकाश कुमार के साथ,नोट बंदी के कारण कलेक्शन में प्रॉब्लम तथा मीटिंग के  कारण ऑफिस में मेरा 3 मॉनिटरिंग कम हो गया मेरा टोटल मॉनिटरिंग 9 गो था । 

Bandhan bank-बंधन बैंक मेरे ऊपर घटित घटना

पचरुखी डीएससी भीजीट   किया तो ज्यादा तर उन स्टाफ का ग्रुप भीजीट  किया जो तेज तरार थे जिनका बार बार छिनतई होता था जो आईटी में ज्यादा काम करते थे ।

 

जैसे  मंटू  , राजनाथ ,विकाश,संजय,के के सिंह का ज्यादा ग्रुप भीजीट किया परन्तु मेरी गलती कहिए या अनुभव की कमी कि मै  स्याम बाबू का ग्रुप भीजीट नहीं कर पाया, समय तो पचरुखी में दिया परन्तु थाना के चक्कर काटने में निकल गया क्यो की दरोगा एफआईआर जल्दी नहीं लिखता था।

 

इन 6 मह में दो बार आडिट हुआ जिसमें पहला आडिट जुलाई 2016 में हुआ, चंदनमिश्रा के द्वारा जो हरेश राय के गांव का ही रहने वाला था उसके रिपोर्ट के अनुसार आरएम का फाइंडिंग्स पर ज्यादा फोकस था।

 

दूसरा आडिट महेंदर के द्वारा किया गया नवंबर 2016 में ये दोनों ओडिट भी शाम बाबू का ग्रुप भिजीट नहीं कर पाए।

 

जब पचरुखी महराजगंज रीजन में चला गया तो नया आरएम पा कर वाहा के बीएम और co खूब मनमानी किए अक्टूबर से नोट बंदी के कारण दो महीना तो बहुत ही कम लोन दिया गया परन्तु दिसम्बर से लोन चालू हो गया था इसलिए ज्यादा गमन दिसम्बर,जनवरी, फरवरी माह में किया गया।

Bandhan bank-बंधन बैंक का गलत गाइड लाइन

ज्यादा गमन होने का मुख्य कारण     अनपढ़ कस्टमर , एटम के साथ पिन, रिबायोकैपचर का आप्शन खुला होना,डीएससी हेड का पासवर्ड शेअर करना, ज्यादातर गमन रीबायोकैपचर करके तथा ईटीएम से पैसा निकाल कर किया गया था ।

 

सारा दोष हमारे ऊपर आ गया  जब मै आरएम पोस्ट ज्वाइन किया था तो हमसे पहले आरएम लवकुमार कोनाई थे तथा डीएम अनुपम चक्रवर्ती थे।

 

उन लोगो ने भी मुझे  कोई जानकारी नहीं दिए थे कि श्यामबाबू अप्रैल 2016 में भी कुछ एक से डेढ़ लाख का फेक लोन दिया था और मै तो 2 जून 2016 को ज्वाइन किया था।

 

और तो और पता करने पर पता चला कि श्यामबाबू पचरुखी से पहले  जनता बाजार में था तो वहां भी दो कस्टमर से 15 ,15 हजार रुपया   ले लिया था जो पकड़ा गया फिर भी उसको माफ करके उसे पचरुखी ट्रांसफर कर दिया गया था।

 

जहां जा कर इतना बड़ा घटना को अंजाम दिया और मै आरएम बनकर गया तो मुझे कोई जानकारी नहीं दी गई ।

 

और सारा दोषी मुझे बनाया गया और मुझे टर्मिनेट कर दिया गया मेरे सात शाल का परिश्रम का फल इस प्रकार से मिला कि मुझे अपनी सफाई में कुछ भी कहने का मौका तक नहीं दिया गया।

 

मै अपनी गलती भी स्वीकार किया तथा मै ये भी बोला की मेरी गलती की सजा दीजिए मुझे डिमोशन दीजिए परन्तु काम से मत निकालिए परन्तु मेरी कोई नहीं सुना यहां तक कि एमडी सर भी हमारा अपील ठुकरा दिए यही है मेरी दुख भरी दास्तान।

थैंक्स

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