15 August 2019

15 अगस्त 2019, 15 August 2019

              15 अगस्त 2019 का महीना, हमारे भारतीय इतिहास के पन्नों   में सुनहरे अछरो में लिखा जाएगा , क्यों की हमारे  पिछले 70 बरसो की  गई भूल को सुधारने का स्वर्ण काल माना जाएगा ,भारतीय प्रधान मंत्री मोदी जी में वो अदम्य साहस और छंमता है जो कठिन से कठिन फैसला बड़े ही सहज एवम् सरल तरीके से लेे लेते है।


       Jammu-kasmir से आर्टिकल 370 कब हटाया गया ?
              
         ” 5 अगस्त 2019″ का दिन कश्मीर की असली आजादी मानी जाएगी चंद्रशेखर आजाद ,भगत सिंह के सपनों
को एक नई दिशा प्रदान करते हुवे माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 को राज्य सभा में एक ऐतिहासिक jammu-kasmir अधिनियम 2019 पेश किया जिसमें जम्मू कश्मीर राज्य से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का विभाजन जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के दो केंद्र शासित क्षेत्रों के रूप में करने का प्रस्ताव किया गया । जम्मू कश्मीर केंद्र शासित क्षेत्र में अपनी विधायिका होगी जबकि लद्दाख बिना विधायी वाली केंद्रशासित क्षेत्र होगा।
 
      मोदी जी के ऐतिहासिक निर्णय से बिपछ का जलना लाजमी है परन्तु इतना भी ना जलिय की हमारे पड़ोसी मुल्क को लगे कि भारत एवम् भारत के  प्रधान मंत्री कमजोर है पाकिस्तान के प्रधान मंत्री बोलता है कि मै भारत के साथ अपना व्यपारिक रिश्ते खत्म कर लेंगे उसको पता नहीं कि इस फैसले से वो कभी प्रधान मंत्री मोदी नहीं बन सकता उसको पता नहीं कि आज कश्मीर के लोग कितने सुकून महसूस कर रहे है ।
             कोंग्रेस के नेता गुलाम नवी आजाद को अपने स्टेटमेंट में बदलाव करके सरकार  का साथ निभाना चाहिए ना की ऐसी परिस्थितियों में बेतुके बयान बाजी करके हमारे दुश्मनों का हौसला बढ़ा रहे है कश्मीर में हमारे सैनिक रोज शहीद होते  है बेकसूर  जनता मारी जाती है तो तुम लोग सवाल करते हो ये घटना कैसे हुआ सरकार को जवाब देना चाहिए  और कश्मीर के हक में इतने सुन्दर फैसले को समर्थन देने के बजाय सुप्रीम कोट में याचिका दायर करते  हो और बोलते हो जनता के हक में बात कर रहे है।
       इन नेताओ ने कभी जनता के गिरेबान में झाक कर देखा है कि आखिर जनता क्या सोचती है उसकी तकलीफ क्या है चुनाव आता है तो बोलते है मै जीत रहा हूं वो पार्टी हार रही है लेकिन चुनाव नतीजे आने के बाद बोलते है जनता के जाना देस को स्वीकार करते है और अपनी हार को भी।
      सर्म आनी चाहिए ऐसी राजनीत को  ये लोग ना कभी जनता के बीच में जाएंगे ना ही उनकी समस्याओं को सुनेगे सिर्फ जनता के दिमाग में एक दूसरी पार्टी को नीचा दिखाएगें  और क्यू की वो जानते है जनता 19 वी सदी की है ,उन्हें पता होना चाहिए की जनता अब समझदार एवम् जागरूक हो चुकी है वक़्त आने पर जवाब भी बहुत सुंदर तरीके से देती है।
          आज के नेता जनता के फायदे के लिए नहीं अपनी रोटी सेकने के लिए पार्टी ऐसे बदलते है जैसे एक बदचलन स्त्री  एक रात के बाद अपना पति बदल लेती है ऐसी स्थिति में जनता भी मुक दर्शक बनकर सबकुछ देखती है कि उसके जज्बातों के साथ ये नेता कैसे खिलवाड़ कर रहे है।
           कहते है ये विचारो की लड़ाई है अरे महानुभव
विचार आपके बदल साक़ते  है हम गरीबों का नहीं क्यू की गरीबों के मुंह में खून नहीं लगता।

धन्यवाद

        

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