‌नेतृत्व का गुण Quality of leadership

‌नेतृत्व का  गुण  Quality of leadership

नेतृत्व का गुड़ कैसा होना चाहिए आज के उभरते नेताओ को उसका ABCD ही नहीं मालूम है आज हमारे समाज में ऐसे नेता भी है जिसको एक एप्लिकेशन लिखने को बोल दिया जाए तो उसमें भी उसे  अपने P A का सहारा लेना पड़ता  है ,जिस देश का इतना बड़ा लोक तंत्र हो वाहा पर एक अंगूठा छाप को भी जनता अपना प्रतिनिधि चुन लेती है यह कहा तक सही है।

          एक बार जितने के बाद चाहे एक छोटे से गांव का ग्राम प्रधान हो या नगर पंचायत का वाड कमिस्नार ये सभी जितने के बाद अपने आप को पीएम समझने लगते है ये लोग इतना व्यस्त हो जाते है कि, अपने छेत्र का वीकली नहीं तो मंथली मोइना करने में भी अपनी सान को घटने के समान समझते है उन्हें ये नहीं पता कि जिस सान को वो जी रहे है वो भी जनता की बदौलत मिली है ।

       राजनीत का नया दौर New era of politics

         भारतीय संविधान में बाबा साहेब आंबेडकर एक चीज लिखना भूल गए कि भारतीय नेतृत्व की योग्यता क्या होनी चाहिए जिससे हमारे समाज का भला हो सके आज देश की राष्ट्रीय पार्टियां अपना टिकट किसी बाहु बली को तो ,किसी रेपिस्ट को, तो कहीं क्रिमिनल को बाट कर अपना सान समझती है अभी एकिस्वी सदी में एक नया चलन आया है जिसमें बाबाओं के रसूख के आड़े राजनीत खूब फल फूल रहा है तथा बाबाओं का सहारा लेकर सत्ता की कुर्सी हासिल करने का एक नया फार्मूला तैयार किया गया है तो ऐसे में बाबा कहा पीछे रहने वाले है वो लोग भी धर्म और सत्ता छाओ तले भोली भाली लड़कियों को फसा कर अपने कुकर्म को अंजाम तक पहुंचा रहे हैं।

     एकिसवी सदी के नेतृत्व के गुण का काला  सच The dark truth of the leadership qualities of the eleventh century

एकिसवि सदी में नेतृत्व की काली सच्चाई यह है कि चुनाव में जितना धन बहाना हो बहा दो अपने छेत्र में      वोटर को खरीदने के लिए पैसा, सराब,कपड़ा बटवा दिया जाता है, यदि हाई प्रोफ़ाइल मंत्री से कोई बात मनवानी हो तो भारी भरकम रकम के साथ साथ    लड़कियां भी सप्लाई करवाई जाती है ,और लोवर क्लास की राजनीति हो तो मुर्गा खिला कर भी काम निकाला जा सकता है, ऐसी पार्टी अथवा नेता जितने के बाद यदि बहुमत ना मिले तो बहुमत जुटाने के लिए एक एक विधायक को मंत्री बनाने का ऑफर तथा पाच करोड़ से लेकर दस करोड़ का नगदी  का लालच देकर जोड़ तोड़ की सरकार बनाते  है तथा पाच साल जनता की तिजोरी खाली करके अपनी तिजोरी भरते है  ये भारतीय राजनीति की काली सच्चाई ।
‌नेतृत्व का गुण Quality of leadership
         और बाद में नतीजा क्या मिलता है हमारे समाज को एक भ्रष्ट नेतृत्व जिससे ना ही छेत्र का ना ही मानवता का विकास हो पाता है और माननीय राहुल जी की वो बात चरितार्थ हो जाती है जिसमें उन्होंने ने कहा था कि”विकास पागल हो गया है” तो मै कहता हूं जनाब की विकास कभी पागल नहीं होता है पागल तो हम और आप है जो ऐसी गन्दी राजनीती को सह देते है जिसमें चिन्मया नन्द,राम रहीम,आसाराम जैसे भयानक अपराधियों को सरछन मिलता है।

नेतृत्व का गुण दिल से Leadership qualities from the heart

आज के दौर में नेतृत्व दिल से नहीं बल्कि दिमाग से कि जाती है जिस मंच से नेता लोग जनता को संबोधित करते है उस मंच पर उनकी भा उ कता उनकी एक एक वाणी बनावटी होती है क्यू की उनकी जुबान बिना स्क्रिप्ट राइटर के लिखे बिना चल ही नहीं सकती ,वो भासन तो किराए का भाषण होता है वो मंच पर क्या बोले वो तो थोड़े देर में ही कागज के पन्नों में दब कर रह जाती है और नेता जी आगे बढ़ जाते है।
             ऐसे नेताओ से समाज को उपेछा ही मिलती है अपेक्षा नहीं की जा सकती आज के दौर में हमारे नेता गड़ जनता के जज्बातों से सिर्फ खिलवाड़ करना जानते है उनकी पीड़ा उनकी व्यथा को भला कौन सुनता है देश के अंदर आज बेरोजगारी चरम सीमा पर पहुंचती जा रही है जिसके पास रोजगार है उसका रोजगार छीना जा रहा है देश का अर्थ बेवस्था गरत में गोते लगा रही है ,तथा महंगाई चरम सीमा को पार कर रही है जनता के अहम मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है  तो हमें ये समझ में नहीं आता है कि आखिर ये पैसा जा कहा रहा है ।

धरातल पर नेतृत्व का गुण   Leadership qualities on the ground

धरातल पर पैर रखने वाले नेताओ का गुड़ अत्यंत सिम्पल एवम् सादगी भरा होना चाहिए जनता उसकी फसल एवम् छेत्र उसकी खेती होनी चाहिए जिस प्रकार एक किसान सुबह उठ कर नित्य रोज अपने खेतों पर जाता है अपने एक एक फसल को निहारता है तथा उसको पानी की जरूरत है कि खाद की इसका विशेष ध्यान रखते हुवे समय से उन जरूरतों को पूरा करता है तब जाकर एक सफल किसान बन पाता है, ठीक वही काम नेताओ के अंदर होनी चाहिए ।
         गरीब जनता बड़े लोगो के प्यार की प्यासी रहती है उसकी हार्दिक इच्छा होती है कि कोई बड़ा राजनेता उसका भी कभी हाल चाल पूछने उसके दरवाजे पर आएगा परन्तु हमारे नेताओ को इतना फुरसत कहा है उसको तो सिर्फ वोट की जरूरत थी वो उस ने हाथ पैर जोड़ कर लेलिया , अब तो हमारी बारी है पाच  साल हाथ जोड़ने की नेता जी तो अब सिर्फ लक्जरी गाड़ियों के अंदर ही हाथ जोड़ते हुवे नजर आएंगे ।
             सभा के अंदर ,हम गरीबों के मसीहा है तो ,मै किसानों की सभी समस्या खत्म कर दूंगा ,नई शड़के बनाऊंगा,अस्पताल खुलवाऊंगा, मुफ्त पेय जल उपलब्ध करा दूंगा,गरीब परिवारों को राशन उपलब्ध करा दूंगा ऐसे अनेक लुभावने भासडो से जनता को अच्छे दिन का सपने दिखा कर बरसाती बेंग की तरह ऐसे गायब होते है कि पांचवे साल के बरसात में ही नजर आएंगे।
थैंक्स

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