भारतीय अर्थ बेवॉस्था Indian economy

 भारतीय अर्थ बेवॉस्था Indian economy

 

भारतीय अर्थ बेवॉस्था Indian economy

आज की तारीख में भारतीय अर्थ बेवास्था का हालत दयनीय स्थिति में चली गई है जिसका जवाब फिर हाल सरकार के पास नहीं है सरकारी मसिनरी फेल हो चुकी है पिछले सात सालों में आज का जीडीपी सबसे निचले पायदान पर चला गया है पिछले साल जीडीपी 5.8%था जो कि लुढ़क कर 5.0%पर चला गया है 2013/14में जीडीपी 8.2%पर था ।

         आटो सेक्टर में मंडी छाई हुई है वर्करों की छटनी हो रही है लाखो लोग बेरोजगार हो रहे है वैसे बीजेपी सरकार में पहले से ही बेरोजगारी दर आपने चरम पर है सरकार विदेश नीति पर तो सफल रही परन्तु आर्थिक नीति पर पूरी तरह से विफल हो गई है सरकार की नोट बंदी जीएसटी मेक्क इन इंडिया योजना पूरी तरह से फेल हो गया है ।

           इसका मुख्य कारण है  आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन का कार्य काल ना बढ़ाना अर्जित पटेल का त्याग पत्र देना हमारे भारत में कुछ ऐसी संस्थाएं है जिसमें सरकार का दखल भारतीय लोक तंत्र की हत्या के बराबर माना जाता है जीमे सुप्रीमकोर्ट,सीबीआई, इडी,भारतीय रिजर्व बैंक,संविधान, इन सबसे छेड़ छड़ एक दिन बीजेपी सरकार को गर्त में धकेल देगी जिससे। उबर पाना सरकार के बस का नहीं रहेगा ।

          सरकार को अपने नीतियों में बदलाव करना होगा जिससे नए नए रोजगार का सृजन हो सके किसानों को राहत देना होगा कृषि लोन ,सिंचाई बेवास्था,खद,बीज ,कृषि यंत्र लोन, पर ये सब चीजो पर तो सरकार योजना चलाती है मगर  कागज में ही सिमट कर रह जाता है  ऊपर से सरकारी मसिनारी खाद की बोरी से पांच किलो खाद ही कम्म कर देती है और मूल्य वहीं का वहीं रहता है किसान को बैंक वाले इतना चक्कर कटवाते है कि वो लोन लेना ही भूल जाते है इसके उपरांत वो भी किसान है जो लोन इसलिए उठाते है की चलो  माफ तो हो ही जाएगा परन्तु खेती भी नहीं करते है वो एक तरह से फ्रॉड किसम के लोग होते है ऐसे मामलों मै बैंक वालो को भी एक कमेटी बनानी होगी जो सही लोगो को रोजगार के लिए कृषि के लिए, काम से काम पेपर वर्क करा कर लोन दे सके
धन्यवाद ।

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