निर्भीक बानो उन्नति करो Grow bold boldly

                                   निर्भीक बानो उन्नति करो

निर्भीक बानो उन्नति करो Grow bold boldly


इंग्लैंड का प्रधान मंत्री डी जरायली 1839/1880में एक मध्यमवरगीय परिवार में पैदा हुआ था लेकिन अपनी हिम्मत और निर्भीकता के कारण अपने कद कि बहुत ऊंचा उठाया था जब उसने अपना अगला कदम राजनीत में रखा तो वहां भी उसे सफलता मिला  लेकिन जब उसने “हाउस ऑफ कॉमन्स” में पहली बार भासड दिया तो वह बहुत मुश्किल से कुछ ही स्पीच देकर अपनी वाडी को समाप्त कर दिया इस  पर हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्यों ने उसका बहुत मजाक उड़ाया और उसपर व्यंग कसे

डीजराएली का निर्भीकता एवम् आत्मविश्वास

यह देख डिजरा एली ने अपने दिल को काबू किया और चेहरे पर आत्मविश्वास का भाव लाते हुवे निर्भीकता से अपने मजाक उड़ाने वालों को उत्तर दिया “सुनिए जल्द ही वो समय भी आयेगा जब आपलोग मेरे स्पीच को ध्यानपूर्वक एवम् उत्सुकता से सुनेगे । इस अवसर पर उसकी निर्भीकता ने उसे ऐसा बल दिया कि एक दिन वो एक सफल वकता बना उसके यही गुण एक दिन उसे इंग्लैंड का प्रधानमंत्री बना दिया और एक बार ही नहीं लगातार २५ वर्षों तक इस आसन पर काबिज रहा।

“यदि आप निर्भीक भाव से कम करते है तो आपका उस काम पर बिस्वास भी दृढ़ हो जाता है जहा भी आपके मन में थोड़ा भी डर एवम् संसाय पैदा हुआ कि आपका विश्वास भी डगमगाने लगेगा और हुआ तो अच्छा भला काम बी बिगड़ जाएगा।”

आपकी निर्भीकता your confidence

 आपकी निर्भीकता और दृढ़ विस्वास से ही बहुत सारी ताकते आपका सहयोग के लिए एकत्रित हो जाती है ऐसी ताकते जिसके बारे में आप कभी सोचते भी नहीं होंगे आपके मन की निर्भीकता और विस्वास से दूसरा व्यक्ति प्रभावित हुवे नहीं रह सकता है जिस तरह चुंबुक दूसरी लौह वस्तु से अपना आकर्षण रखती है उसी तरह आपकी निर्भीकता आपके अंदर एक चुंबकीय सकती का निर्माण करती है।

निर्भीकता का तेज

निर्भीक व्यक्ति के ललाट पर एक अजीब तरह का तेज पाया जाता है इसके साथ ही मेहनत ,लगन,ईमानदारी का गुड़ भी सामिल हो जाय तो ऐसे व्यक्ति का मुकाबला भला कौन कर सकता है अधिकांशतः बेईमानों एवम् गलत करने वालों के अंदर निर्भीकता नहीं पाई जाती है उनके मन में एक अनजाना डर समया रहता है इसलिए वह कभी किसी आदमी से आँख मिला कर बात नहीं कर सकता है

निर्भीक फौजी लघु कथा

        दुतिय विश्व युद्ध में वर्मा के मोर्चे पर अंग्रेज फौज एक पहाड़ी। पर अपना मोर्चा जमाय हुवे थी जापानी फौजो ने पूरे दल बल के साथ उस पहाड़ी पर हमला बोल दिया जापानी फौज के सामने अंग्रेजी सेना कमजोर पड़ रही थी काफी देर तक मुकाबला करने के बाद अंग्रेजी सेना के पास गोला बारूद समाप्त होने लगा यह देख कर कंपनी कमांडर ने अपनी भारी तोपों को नस्ट कर मोर्चा खाली करने का आदेश दिया।

      अधिकांश सैनिक कमांडर के आदेश का पालन किया लेकिन एक तोपची अपना तोप छोड़ कर जाने को तैयार नहीं था हाला की उसके पास थोड़ा भी गोला बारूद नहीं बचा था फिर भी अपने तोप की सुरक्षा करने का निश्चय। कर लिया उसने देखा आठ जापानी सिपाही उसकी तोप पर कब्जा जमाने के लिए तेजी से उसी पहाड़ी पर आ रहे है फिर क्या उसने आव देखा ना ताव उसने तोप से एक लंबा डंडा निकाल घात लगा  कर तोप के आड़ में बैठ गया जापानियों ने दूरबीन से देख लिया था कि अंग्रेजी फौज मोर्चा छोड़ कर जा रही है अतः वो लोग निश्चिंत होकर पहाड़ी पर चढ़ आए जैसे ही वो लोग तोप के समीप आए तोपची अचानक उनके सामने खड़ा हो गया और इतनी फुर्ती से उनके ऊपर टूट पड़ा कि उनको संभलने का भी मौका नहीं मिला उन आठो को मारने के बाद वह अपने तोप को सुराछित बचा लिया।

      उसकी इस बहादुरी को देख कर अंग्रेज सरकार ने उसे सर्वोच्च वीरता पदक “विक्टोरिया क्रस” पदक से सम्मानित किया उस टोपची ने वह कार्य पदक के लोभ में नहीं किया था उसे तो अपने तोप से प्यार था उसे बचाने का संकल्प उसके मन में डर को आने नहीं दिया और उसके हृदय की निर्भीकता के बल पर अपने  कार्य में सफल रहा।

       “जो व्यक्ति अपने लच्छय की सीधी के लिए मर मिटने का कसम खा कर आगे बढ़ता है वह अवश्य बिजयी होता है । जहा संबंध ,सिफारिश,योग्यता,और भाग्य की सिवाय भी काम नहीं आती वहा साहस काम आता है”
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