अपनी सोच

अपनी दिनचर्या
अपनी सोच

 अपनी दिनचर्या में रोज सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए तथा सुबह सुबह रोज टहलना चाहिए फिर नित्य रोज आधे घंटे योगा में समय बिताना चाहिए फिर अस्नान धियान करके हल्का नाश्ता लेकर अपने काम पर निकल जाना चाहिए ऐसी दिनचर्या अपनाने से आपका शरीर सवस्थ एवम् स्फूर्तिवान बना रहेगा तथा आपका सम्पूर्ण कार्य अपने निर्धारित समय पर पूरा हो जाएगा जिन्दगी आपकी है परन्तु इसकी दौर तो भगवान के हाथ में है यदि कोई इंसान भगवान को नहीं मानता है तो वह मूर्ख है मै भी कभी भगवान् को नहीं मानता था कुछ परिस्थितियों के सामने इंसान को सर झुकाना पड़ता है तथा अंततः भगवान के सर्णं में जाना ही पड़ता है क्यू की आत्मा और भगवान का मिलन होता है तो बिगड़ा काम भी बन जाता है मै ये नहीं कहता कि किसी साधु या पाखंडी के बातो में आ कर उसकी सेवा भाव करना चाहिए सेवा करना है तो किसी दिन दुखी आत्मा की सेवा कीजिए तब जाके भगवान खुश होंगे और उस आत्मा की दी हुई दुवाएं आपके किस्मत में चार चांद लगा देंगी आदमी को दुख एवम् सुख में यही आत्मा उष आदमी का परम मित्र होती है जो उसका साथ नहीं छोड़ती बुरे वक़्त में मा बाप पत्नी भाई सभी लोग साथ छोड़ देते है परन्तु आत्मा मरते दम तक साथ निभाती है क्यो की वहीं भगवान कि परम भाक़्त होती है धन्यवाद मनोज यादव ।

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